मिथुन मिन्हास: घरेलू क्रिकेट के ‘अनसंग हीरो’ से BCCI के शीर्ष तक का सफर
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रविवार को मुंबई में हुई बीसीसीआई की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के बाद भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक नाम चर्चा में है—मिथुन मिन्हास। बोर्ड की कमान अब एक ऐसे खिलाड़ी के हाथ में है, जिसे भारतीय घरेलू क्रिकेट का एक बड़ा स्तंभ माना जाता है। मिन्हास का करियर आंकड़ों की भाषा में कहें तो 157 फर्स्ट-क्लास मैचों में 9714 रन, 27 शतक और 49 अर्धशतक। ये आंकड़े बताते हैं कि मैदान पर उनका कद कितना बड़ा रहा है। 1997-98 में अपने सफर की शुरुआत करने वाले मिथुन ने जब दिल्ली की कप्तानी संभाली, तो 2007-08 में टीम को रणजी ट्रॉफी का खिताब जिताकर अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा भी मनवाया था।
जम्मू-कश्मीर के भलेसा में 1979 में जन्मे मिन्हास का बीसीसीआई अध्यक्ष तक पहुंचना किसी दिलचस्प पटकथा से कम नहीं है। उन्हें जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) द्वारा नामित किया गया था। उनका ताल्लुक घाटी से गहरा रहा है; 2015 में जब वह जम्मू-कश्मीर की टीम में शामिल हुए, तो न केवल एक खिलाड़ी के तौर पर बल्कि एक प्रशासक के रूप में भी उन्होंने वहां की क्रिकेट संरचना में अपना योगदान दिया। हालांकि, फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में इतने दमदार रिकॉर्ड के बावजूद, भारतीय सीनियर टीम में उन्हें वो जगह नहीं मिल पाई जिसके वो हकदार थे। टी-20 फॉर्मेट में भी उनके नाम 91 मैचों में 1170 रन दर्ज हैं।
मैदान से रिटायर होने के बाद भी मिन्हास कोचिंग और रणनीतिक भूमिकाओं में बेहद सक्रिय रहे हैं। 2017 में किंग्स इलेवन पंजाब के सहायक कोच बनने से लेकर बांग्लादेश अंडर-19 टीम के बैटिंग कंसल्टेंट रहने तक, उन्होंने क्रिकेट को पर्दे के पीछे से भी समझा है। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और बाद में गुजरात टाइटन्स के सहायक कोच के तौर पर काम करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तराशने का काम किया है।
वहीं दूसरी ओर, भारतीय क्रिकेट में इस समय ‘अगली पीढ़ी’ को लेकर चर्चाएं गरम हैं। पूर्व स्पिनर ग्रीम स्वान हाल ही में युवा बल्लेबाज सूर्यवंशी की तारीफ करते नहीं थक रहे। स्वान का मानना है कि सूर्यवंशी जैसा ‘वन्स इन अ जनरेशन टैलेंट’ भारतीय टीम में तत्काल जगह पाने का हकदार है। उन्होंने बेबाकी से कहा कि अगर वह कप्तान या कोच होते, तो पूरी बैटिंग लाइन-अप इसी लड़के के इर्द-गिर्द खड़ी करते। स्वान के मुताबिक, जो लड़का अभी इंग्लैंड में गाड़ी चलाने की उम्र तक नहीं पहुंचा, वह दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने का माद्दा रखता है।
आयरलैंड सीरीज में बेंच पर बैठने के बाद भी सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों की उम्मीदें कम नहीं हुई हैं। आईपीएल में उनके प्रदर्शन ने हर किसी को प्रभावित किया है। ऐसे में जब भारतीय टीम रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव जैसे दिग्गजों के दौर से आगे बढ़कर श्रेयस अय्यर की कप्तानी में नई राह तलाश रही है, तब मिन्हास जैसे अनुभवी प्रशासक का बोर्ड की कमान संभालना और सूर्यवंशी जैसे युवा प्रतिभाओं का उभरना भारतीय क्रिकेट के लिए नए समीकरण तैयार कर रहा है। देखना यह होगा कि ये बदलाव भविष्य में टीम इंडिया को किस दिशा में ले जाते हैं।