बीमा और घर खरीददारों से जुड़ी दो बड़ी खबरें: ₹20 में सुरक्षा कवच और मनमानी करने वाले बिल्डरों पर RERA का कड़ा रुख
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बीमा और वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से हाल ही में दो बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) ने सफलता का एक दशक पूरा कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (K-Rera) ने घर खरीददारों के हक में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ये दोनों खबरें आम आदमी की जेब और उसकी संपत्ति की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।
सिर्फ ₹20 में ₹2 लाख का सुरक्षा कवच: PMSBY के 10 साल
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) ने इस मई में अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। यह योजना उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो महंगे इंश्योरेंस प्लान नहीं खरीद सकते। केंद्र सरकार की इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद कम प्रीमियम है। आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन सालाना केवल ₹20 के खर्च पर यह सुरक्षा मिल रही है। अगर महीने के हिसाब से देखें, तो यह रकम ₹1.67 के आसपास बैठती है, जो शायद एक कप चाय की कीमत का भी दसवां हिस्सा है।
इतनी मामूली रकम में यह योजना दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी अपंगता की स्थिति में ₹2 लाख का बीमा कवर देती है। इस योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक देश भर में 51 करोड़ से ज्यादा लोग इसमें अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
बिना मेडिकल जांच के आसान प्रक्रिया
अक्सर बीमा पॉलिसियों में मेडिकल चेकअप का झंझट होता है, लेकिन PMSBY में ऐसा कुछ नहीं है। 18 से 70 वर्ष की उम्र का कोई भी व्यक्ति, जिसके पास बैंक अकाउंट है, वह इस योजना का लाभ उठा सकता है। इसके लिए आपको बार-बार बैंक के चक्कर काटने की भी जरूरत नहीं है; प्रीमियम की राशि हर साल आपके बैंक खाते से ‘ऑटो-डेबिट’ के जरिए अपने आप कट जाती है। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां और बैंक मिलकर इस सुविधा को घर-घर तक पहुंचा रहे हैं। यह कवर केवल दुर्घटना से होने वाली अनहोनी के लिए है, जो इसे कम आय वाले वर्ग के लिए सुरक्षा का एक मजबूत आधार बनाता है।
बिल्डरों की मनमानी पर रोक: कर्नाटक रेरा का बड़ा फैसला
जहां एक तरफ सरकार जीवन सुरक्षा को आसान बना रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक में घर खरीददारों (Homebuyers) के अधिकारों को लेकर एक बड़ा फैसला आया है। 29 नवंबर, 2025 को कर्नाटक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (K-Rera) ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि बिल्डर्स अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकते।
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा है कि बिल्डरों के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य है कि वे घर खरीददारों को ‘सेक्शन 16’ के तहत बीमा दस्तावेज मुहैया कराएं। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो इमारत को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई बिल्डर को अपनी जेब से करनी होगी। यह फैसला के-रेरा के चेयरमैन राकेश सिंह और सदस्य जी.आर. रेड्डी की बेंच ने सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के तहत प्रोजेक्ट का इंश्योरेंस करवाना और उसे ट्रांसफर करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।
क्या था पूरा मामला?
यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है जो कर्नाटक के कुछ घर खरीददारों ने दायर की थीं। दरअसल, कॉमन एरिया में आग लगने से हुए नुकसान की मरम्मत के लिए जब बीमा के कागज मांगे गए, तो बिल्डर ने हाथ खड़े कर दिए। बिल्डर की दलील थी कि हाउसिंग प्रोजेक्ट का रखरखाव अब ‘अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन’ के पास है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई है।
ट्रिब्यूनल ने बिल्डर की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एसोसिएशन को सौंप देने का मतलब यह नहीं है कि प्रमोटर बीमा करवाने की अपनी जिम्मेदारी से बच जाए। अगर बीमा नहीं करवाया गया है या दस्तावेज हैंडओवर नहीं किए गए हैं, तो मरम्मत का पूरा खर्चा प्रमोटर को उठाना पड़ेगा। रेरा के तहत अनिवार्य बीमा में होने वाले नुकसान का बोझ खरीददारों पर नहीं डाला जा सकता।
घर खरीददारों के लिए क्यों जरूरी है यह जानना
इस फैसले के कानूनी पहलुओं को समझाते हुए खेतान एंड कंपनी के पार्टनर सुधीर मदमैया कहते हैं कि सेक्शन 16 का बीमा घर खरीददारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा है। नियम के मुताबिक, प्रमोटर को प्रोजेक्ट हैंडओवर होने तक का सारा प्रीमियम भरना होता है और उसके बाद इस इंश्योरेंस का लाभ ‘एसोसिएशन ऑफ एलॉटीज’ को ट्रांसफर करना होता है।
मदमैया ने सलाह दी है कि पजेशन लेते समय खरीददारों को बीमा पॉलिसी की कॉपी की मांग जरूर करनी चाहिए। अगर उनके पास ये दस्तावेज नहीं होंगे, तो हैंडओवर के बाद वे न तो इंश्योरेंस क्लेम कर पाएंगे और न ही उसे रिन्यू करा पाएंगे। रेरा के तहत, पजेशन के पांच साल तक स्ट्रक्चरल डिफेक्ट्स (ढांचागत खामियों) के लिए प्रमोटर जिम्मेदार होते हैं। लेकिन अगर सेक्शन 16 वाला बीमा नहीं है, तो नुकसान होने पर घर मालिकों को सीधे बिल्डर से लड़ना पड़ेगा, जिससे उनका कानूनी और वित्तीय जोखिम काफी बढ़ जाएगा।